Thursday, 24 March 2011

यूँ लगा जैसे की सूरज ढह गया...



आज सब अपमान भी मैं पी गया,
आज तूने जो कहा सब सह गया,
अब मेरी यह बात भी सुन लो प्रिये,
आँख का काजल तेरी यह बह गया,
जिसको पाना था हमें वो खो गया,
यूँ लगा जैसे की सूरज ढह गया,
मैं सदा उसके लिए जीता रहा,
जो पराई गोद में सोता रहा,
देख कर यूँ आज उसको इस तरह,
शान्त मन विचलित ह्रदय सा रो गया,
जिसको पाना था हमें वो खो गया,
यूँ लगा जैसे की सूरज ढह गया...


                                      राजीव बाजपेयी

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