वो हमसे प्यार नहीं करती,
फिर वो हमको अपना क्योँ कहती है,
मेरी बातों का अर्थ नहीं उसको पड़ता ।
मेरी बातों का फर्क नहीं उसको पड़ता ।
फिर क्योँ हमको अपना अपना वो कहती है ।
वो जानें क्योँ हमको अपना कहती है ।
हम मंत्र मुग्ध हो बहे चले जाते है ।
हम व्यर्थ उसे अपना ही कहे चले जाते हैं ।
हम जान रहे हैं वो असमर्थ बहुत है ।
हम स्वयँ वहाँ से अभी चले जाते हैं ।
किन्तु कभी ये सोच यहाँ रुक जाता हूँ ।
उसकी सारी बातों पे यकीँ किए जाता हुँ ।
कि मेरे जाने के बाद हमें वो याद करेगी ।
रोएगी वो आँखों से भी बरसात करेगी ।
मेरे दिल की ये बात हमीँ से कहती है ।
फिर क्योँ अपना वो अपना हमको कहती है ।
फिर वो हमको अपना क्योँ कहती है,
मेरी बातों का अर्थ नहीं उसको पड़ता ।
मेरी बातों का फर्क नहीं उसको पड़ता ।
फिर क्योँ हमको अपना अपना वो कहती है ।
वो जानें क्योँ हमको अपना कहती है ।
हम मंत्र मुग्ध हो बहे चले जाते है ।
हम व्यर्थ उसे अपना ही कहे चले जाते हैं ।
हम जान रहे हैं वो असमर्थ बहुत है ।
हम स्वयँ वहाँ से अभी चले जाते हैं ।
किन्तु कभी ये सोच यहाँ रुक जाता हूँ ।
उसकी सारी बातों पे यकीँ किए जाता हुँ ।
कि मेरे जाने के बाद हमें वो याद करेगी ।
रोएगी वो आँखों से भी बरसात करेगी ।
मेरे दिल की ये बात हमीँ से कहती है ।
फिर क्योँ अपना वो अपना हमको कहती है ।
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