Friday, 15 June 2012

दो ह्रदय देखो यहाँ यूँ मिल रहें हैं



दो ह्रदय देखो यहाँ यूँ मिल रहें हैं,
ज्यूँ  चाँद की किरणे जमी पर पड़ रही हों,
देख लो कितना मनोहर द्रश्य है यह,
देवता भी आज स्वागत कर रहें हैं,
                                            दो ह्रदय देखो यहाँ.....................

                                                                 राजीव बाजपेयी 

Friday, 8 June 2012

राजनीति



आज जिधर भी देखो सब हैं सत्ता मद में चूर,
राजनीति करते यहाँ पर,हमें रहें हैं घूर,
आएगा वह समय अहम् भी होगा चकनाचूर,
मिटटी में मिल जायेगा राजनीति का नूर...................

                                            राजीव बाजपयी

Wednesday, 6 June 2012

एक शेर

है तुम्हारा प्यार पवन जानता हूँ मैं मगर,
पर क्या पता मेरे लिए है क्या पता किसके लिए........

                                                          राजीव बाजपयी 

Wednesday, 21 March 2012

अनुशासन

आजादी नही मिली तो आज इस मुकाम पर हूँ,
सभी का प्यार पाया सभी की जुबान पर हूँ....