दो ह्रदय देखो यहाँ यूँ मिल रहें हैं,
ज्यूँ चाँद की किरणे जमी पर पड़ रही हों,
देख लो कितना मनोहर द्रश्य है यह,
देवता भी आज स्वागत कर रहें हैं,
दो ह्रदय देखो यहाँ.....................
राजीव बाजपेयी