Tuesday, 14 May 2013

राग जो गाये ही


छन्द जो लिखे ही नहीं,
गीत इतने कि समाये ही नहीं,
कई महफ़िलों की शान बने,
राग जो गाये ही नहीं........
राजीव बाजपेयी

तू उसको ही भूल गयी


अंखियन बीच बसाया जिसने तू उसको ही भूल गयी,
हुई बावरी किसकी खातिर अपना सबकुछ भूल गयी,
कैसी उलझन,कैसी चाहत तुझको कुछ तो याद नहीं,
जिसको अपना कहती थी तू,तू उसको ही भूल गयी..........
राजीव बाजपेयी

एक सच


पूरी दुनिया से जुदा हो के सहेजा तुमको ,
तुम तो गैरों की तरह हमसे जुदा होते गए..... 
राजीव बाजपेयी

महायुद्ध


जीवन के इस महायुद्ध् में सच को झुकते देखा है,
स्वार्थ हेतु हमने मानव को नंगा होते देखा है,
प्यार मोहब्बत इस दुनिया में केवल कोरी बाते हैं,
खून के रिश्ते को भी हमने धूमिल होते देखा है,
                                             जीवन के इस महायुद्ध् में......
मर्यादा की क्या बात करें हम क्या सम्मान करें तेरा,
हमने तुझको मर्यादा का गला घोटते देखा है,
किसको शीश झुकाऊं  जग में किसको अपना समझूँ मैं,
मैंने अपने शुभचिंतक को रंग बदलते देखा है,
                                               जीवन के इस महायुद्ध् में.......
माँ बेटा और भाई बहेन ये पूजनीय सब रिश्ते हैं,
पहले हमने इन रिश्तो को जी भर पूजते देखा है,
अब किस रिश्ते को पूजूँ और किसका मैं सम्मान करूँ,
कुछ पैसों की खातिर हमने इनको बिकते देखा है,
                                                 जीवन के इस महायुद्ध् में.........