Tuesday, 14 May 2013

महायुद्ध


जीवन के इस महायुद्ध् में सच को झुकते देखा है,
स्वार्थ हेतु हमने मानव को नंगा होते देखा है,
प्यार मोहब्बत इस दुनिया में केवल कोरी बाते हैं,
खून के रिश्ते को भी हमने धूमिल होते देखा है,
                                             जीवन के इस महायुद्ध् में......
मर्यादा की क्या बात करें हम क्या सम्मान करें तेरा,
हमने तुझको मर्यादा का गला घोटते देखा है,
किसको शीश झुकाऊं  जग में किसको अपना समझूँ मैं,
मैंने अपने शुभचिंतक को रंग बदलते देखा है,
                                               जीवन के इस महायुद्ध् में.......
माँ बेटा और भाई बहेन ये पूजनीय सब रिश्ते हैं,
पहले हमने इन रिश्तो को जी भर पूजते देखा है,
अब किस रिश्ते को पूजूँ और किसका मैं सम्मान करूँ,
कुछ पैसों की खातिर हमने इनको बिकते देखा है,
                                                 जीवन के इस महायुद्ध् में.........

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